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बाबा तिलका मांझी : भारत का प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी (जीवनी)


सरना टुडे : बाबा तिलका मांझी (1750–1785) भारत के पहले आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1857 से बहुत पहले 1784 में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए। संथाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले तिलका ने गुलेल से ब्रिटिश अफसर क्लीवलैंड को मारकर विद्रोह किया और अंततः 13 जनवरी 1785 को भागलपुर में बरगद के पेड़ पर फांसी पर लटकाए गए। 


बाबा तिलका मांझी का जीवन परिचय :


जन्म: 11 फरवरी 1750, बिहार के सुल्तानगंज के तिलकपुर में संथाल परिवार में मुर्मू गौत्र में हुआ था।


अन्य नाम: इन्हें 'जबरा पहाड़िया' के नाम से भी जाना जाता था।


विद्रोह की शुरुआत: 1771 से 1784 तक अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों और जमीन हड़पने के खिलाफ आदिवासियों को संगठित किया।


ऐतिहासिक घटना: 1784 में भागलपुर के ब्रिटिश कमिश्नर ऑगस्टस क्लीवलैंड को एक गुलेल (slingshot) से मारकर घायल किया और बाद में उसकी मौत हो गई।


शहादत: पकड़े जाने के बाद, उन्हें घोड़ों से घसीटकर भागलपुर लाया गया और 13 जनवरी 1785 को एक विशाल बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी गई।


विरासत: उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला शहीद माना जाता है। भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय रखा गया है। 


तिलका मांझी ने "धरती हमारी है" का नारा दिया था और ब्रिटिश शासन के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ा। 


बाबा तिलका मांझी के बारे में विस्तार से जानने के लिए सरना टुडे के यूट्यूब चैनल पर जाकर देंख सकते हैं.

वीडियो लिंक :- https://youtu.be/MQDUt8bCRt4?si=NifUG-AMjlxsgzw9

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