सरना टुडे, नई दिल्ली : ओल चिकी एक भारतीय लिपि है, जो संथाली भाषा लिखने में प्रयुक्त होती है। इसका आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने वर्ष 1925 में किया था। यह संथाली के लिए आधिकारिक लेखन प्रणाली है, जो भारत में एक आधिकारिक क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त एक आग्नेय भाषा है। इसमें 30 अक्षर हैं, जिनके रूपों का उद्देश्य प्राकृतिक आकृतियों को उद्घाटित करना है। लिपि बाएँ से दाएं लिखी गई है, और इसके दो रूप हैं (छापा और उसारा); बाद वाले का यूनिकोड नहीं है। दोनों रूपों में, इस वर्णमाला का आविष्कार बिना किसी अक्षर केस के हुआ था।
पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में विकसित ओल चिकी लिपि (Ol Chiki Script) 2025 में 100 वर्ष पूरे कर रही है। संथाली भाषा की यह वैज्ञानिक लिपि जनजातीय पहचान का प्रतीक है, जिसे 2003 में 92वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह लिपि प्रकृति से प्रेरित 30 अक्षरों से बनी है।
पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में विकसित ओल चिकी लिपि (Ol Chiki Script) 2025 में 100 वर्ष पूरे कर रही है। संथाली भाषा की यह वैज्ञानिक लिपि जनजातीय पहचान का प्रतीक है, जिसे 2003 में 92वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह लिपि प्रकृति से प्रेरित 30 अक्षरों से बनी है।
ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष: मुख्य विवरण
जनक: पंडित रघुनाथ मुर्मू (ओडिशा के मयूरभंज)।
स्थापना: 1925 में विकसित, 1939 में पहली बार सार्वजनिक।
विशेषता: 30 अक्षर, जो प्राकृतिक आकृतियों, मानव शरीर और दैनिक वस्तुओं पर आधारित हैं।
महत्व: यह संताली भाषा को एक समर्पित लिपि देकर सांस्कृतिक संरक्षण सुनिश्चित करती है। 2003 में इसे आधिकारिक मान्यता मिली, और 2025 में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसी लिपि में संताली संविधान जारी किया।
शताब्दी समारोह: 2025 में इसके 100 वर्ष पूरे होने पर, Tata Steel Foundation ने विशेष शताब्दी पुरस्कार और Ommcom News ने एक वर्ष का प्रचार अभियान चलाया , जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले के खुकड़ाडीह स्थित सिदो कान्हु जाहेर गाढ़ में दिनांक 14 व 15 फरवरी 2026 को आसेका झारखंड के द्वारा ओल चिकी शताब्दी वर्ष समारोह मनाया गया एंव दिशोम जाहेरथान करनडीह में आईसेक द्वारा भी ओल चिकी शताब्दी वर्ष मनाया गया, जिसमें महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मू अतिथि के रूप में शामिल थी.
शताब्दी वर्ष का संदर्भ:
100 वर्षों के बाद, यह लिपि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में संताली भाषा के लेखन की मुख्य प्रणाली बन गई है।

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