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घाटशिला स्थित सिदो-कान्हु मैदान, पावड़ा में 'माझी परगना महल, धाड़ दिशोम द्वारा आयोजित ‘धाड़ दिशोम बार माहारी मारांग सेनेलेद कमीहोरा’ कार्यक्रम में देश परगना बाबा के अनुमति से राजदा गोराम के माझी बाबा युवराज टुडू के नेतृत्व में बनाया गया 'प्रशिक्षण दल' के युवा कैंपेनिंग करते हुए। इस कैंपेनिंग में ग्राम पंचायत विकास योजना के निर्देशिका इत्यादि के बारे में लोगों को समझाया गया।

घाटशिला स्थित सिदो-कान्हु मैदान, पावड़ा में 'माझी परगना महल, धाड़ दिशोम  द्वारा आयोजित ‘धाड़ दिशोम बार माहारी मारांग सेनेलेद कमीहोरा’ कार्यक्रम में देश परगना बाबा के अनुमति से राजदा गोराम के माझी बाबा युवराज टुडू के नेतृत्व में बनाया गया 'प्रशिक्षण दल' के युवा कैंपेनिंग करते हुए। इस कैंपेनिंग में ग्राम पंचायत विकास योजना के निर्देशिका इत्यादि के बारे में लोगों को समझाया गया। 


इसी के साथ साथ अंपा कु. हेम्ब्रम (प्रो. सालबनी ड्रिगी काॅलेज)द्वारा PESA नियमावली आधार लिखी गई पुस्तक 'संथालों का स्वशासन व्यवस्था', 'मांझी अखाड़ा ट्रेडिशनल ग्राम सभा', 'मॉडल संथाल विलेज' इत्यादि पुस्तक रखा गया था। कुछ कुछ लोगों ने इन पुस्तकों की खरीदारी की।

29 मार्च 2026 को घाटशिला के काशिदा में स्थित "रास्का" रामदास टुडू हेरिटेज, चेंगजोड़ा कशीदा में All Santal Intellectual and Academicians Association द्वारा आयोजित बैठक घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस बैठक में झारखंड, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल में कार्यरत संताली भाषा विभाग के प्रोफ़ेसरों ने भाग लिया तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक विषयों पर गहन चिंतन-मंथन किया गया।

झारखंड सरकार के PESA नियमावली आधार लिखी गई पुस्तक 'संथालों का स्वशासन व्यवस्था' घाटशिला विधानसभा के विधायक माननीय सोमेश चंद्र सोरेन को प्रो. अंपा कु. हेम्ब्रम के द्वारा देते दिया गया।

अंपा कु. हेम्ब्रम ने कहा कि स्वशासन व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश आदिकाल से चली आ रही है, यह कोई नई बात नहीं है। झारखंड राज्य में 2 जनवरी 2026 से PESA नियमावली 2025 लागू हो गई है। अब स्वशासन व्यवस्था को कमजोर करने की कोई भी साजिश कर ले, उसकी साजिश सफल होने वाली नहीं है। 


अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस नियमावली को जमीनी स्तर पर यानी गांव स्तर पर किस प्रकार से लागू किया जाए। नियमावली में सिर्फ मांझी बाबा के दायित्व का उल्लेख किया गया गया है, पराणिक बाबा, जोगमाझी बाबा, गोडेत बाबा एवं नाइके बाबा का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया है, इसीलिए नियमावली का गांव के परंपरा के हिसाब से लिखना जरूरी है। नियमावली में युवाओं के मार्गदर्शन एवं ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था सशक्तिकरण के ऊपर कुछ खास उल्लेख नहीं किया गया है, जो अभी गांव को सशक्त करने में बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। इन सब विषयों पर चर्चा नहीं हो रही है यह एक बड़े दुख की बात है । 


नियमावली के हर एक कंडिका/भाग के अंदर एक-एक शब्द का अध्ययन करना होगा, ताकि अगर कोई भी त्रुटि रहे तो उसको हम निकल सके। नियमावली के जिस भाग/कंडिका में हमें लगे कि हमारे परंपरा के हिसाब से नहीं है, उसे भाग को हमें चिन्हित करने की जरूरत है। अगर नियमावली के किसी भाग/कंडिका में कुछ नया जोड़ने की जरूरत है तो उसे भी हमें जीवित करके लिखने की जरूरत है। उसके बाद हम राज्य सरकार को सुझाव प्रस्ताव करेंगे ताकि सीमित समय (नियमावली के प्रकाशन के 1 वर्ष के अंदर ) में सुझाव राज्य सरकार तक पहुंच सके।



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