सरना टुडे, नई दिल्ली : भारत की राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि ओल चिकी का सौवां साल इस स्क्रिप्ट को बढ़ावा देने का फैसला करने का मौका होना चाहिए। बच्चे हिंदी, इंग्लिश, उड़िया और बंगाली या किसी भी दूसरी भाषा में पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संथाली भी ओल चिकी स्क्रिप्ट में सीखनी चाहिए।
राष्ट्रपति को यह देखकर खुशी हुई कि कई लेखक अपनी रचनाओं से संथाली साहित्य को बेहतर बना रहे हैं। उन्होंने उन्हें अपनी रचनाओं से लोगों को जगाने की सलाह दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत कई भाषाओं का बगीचा है। भाषा और साहित्य ही वे धागे हैं जो समुदायों के बीच एकता बनाए रखते हैं। साहित्य के लेन-देन से भाषाएँ बेहतर हो सकती हैं। संथाली साहित्य को दूसरी भाषाओं के छात्रों तक ट्रांसलेशन और लेखन के ज़रिए पहुँचाने की कोशिश की जानी चाहिए और इसका उल्टा भी होना चाहिए।
इस मौके पर, राष्ट्रपति ने ओल चिकी के 100 साल पूरे होने पर एक यादगार सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने संथाली लोगों के बीच ओल चिकी स्क्रिप्ट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए संथाल समुदाय के 10 सफल लोगों को भी सम्मानित किया।

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