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रायडीह पीड़ पारगना क्षेत्र के विभिन्न गांवों के माझी बाबा और पारंपरिक अगुवाओं ने सर्वसम्मति से पूर्व पारगना प्रफुल्ल मुर्मू की पत्नी सरस्वती मुर्मू को इस पद के लिए मनोनीत किया।

चौका स्थित खूंटी पंचायत भवन में 29 मार्च 2026 (रविवार) को पारंपरिक माझी पारगाना स्वशासन व्यवस्था की बैठक में सरस्वती मुर्मू को पीड़ पारगना मनोनीत किया गया। रायडीह पीड़ पारगना क्षेत्र के पारगना प्रफुल्ल मुर्मू के निधन के बाद यह पद खाली था। इसी बैठक में चांडिल प्रखंड के विभिन्न गांवों के माझी बाबा और पारंपरिक अगुवाओं ने सर्वसम्मति से पूर्व पारगना प्रफुल्ल मुर्मू की पत्नी सरस्वती मुर्मू को इस पद के लिए मनोनीत किया।


इस निर्णय से समाज में महिलाओं को प्राथमिकता मिलने का संदेश गया है, जिससे वे और अधिक सशक्त होंगी। जब आदिवासी समाज की कोई महिला ऊँचे पद पर पहुंचती है, तो अन्य महिलाओं और लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें बड़े सपने देखने की प्रेरणा मिलेगा।

ऐसी महिला अपने समाज की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझती है, जिससे आदिवासी समाज की आवाज़ पहले से अधिक मजबूत होगी।

इसके साथ ही समाज की सोच में भी बदलाव आता है। जो लोग महिलाओं को केवल घर तक सीमित मानते हैं, उन्हें यह एक सकारात्मक संदेश होगा। महिला के पारगना बनने से अन्य महिलाएं भी सामाजिक विचारधारा से जुड़ेंगे और घर व समाज दोनों के नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

साथ ही इससे महिलाएं सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और संवैधानिक रूप से मजबूत होंगी। साथ ही, जब महिलाएं ऊँचे पदों पर पहुंचती हैं, तो जाति और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव में धीरे-धीरे कमी आती है और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलता है।

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