आजादी की लड़ाई में शहीद अमर बलिदानियों को याद करते हुए मंगलवार को जमशेदपुर प्रखंड के सिदो कान्हू जाहेर गाढ़, खुकड़ाडीह में सिदो कान्हू हूल गांवता के द्वारा हूल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत खुकड़ाडीह नायके बाबा रमेश बास्के के द्वारा पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीणों ने महान आदिवासी क्रांतिकारी वीर सिदो-कान्हू के चित्र एवं मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके संघर्ष को याद किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 30 जून 1855 को सिदो-कान्हू, उनके भाई चांद-भैरव तथा वीर बहनों फूलो-झानो ने ब्रिटिश हुकूमत और जमींदारी शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक हूल विद्रोह का बिगुल फूंका था। जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी।

इसी कड़ी में झारखंड आदिवासी युवा संगठन की महा बाईक रैली का जत्था भी पहुंच कर बलिदानियों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान छात्राओं और ग्रामीणों ने शहीदों के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मौके पर जुगसलाई तोरोप परगाना दशमत हांसदा, समाजसेवी राजकुमार सिंह, झामुमो नेता महावीर मुर्मू, जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं महिलाएं उपस्थित थीं।
हूल दिवस के अवसर पर विभिन्न खेल कूद प्रतियोगिता, ओलचीकि ते ओल हेपराव, बच्चों के लिए सामान्य ज्ञान, तीरंदाजी प्रतियोगिता, लड़कियों के लिए नावा पेड़ा गोड़ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, इसके साथ ही रस्सी खींचना, हाण्डी फोड़ना प्रतियोगिता रखा गया था.सांस्कृतिक कार्यक्रम आदिवासी लोकनृत्य में नागा के नाच दल ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया. सभी लोगों के बीच खिचड़ी का वितरण किया गया.
कार्यक्रम का संचालन बुधराम हेम्ब्रम ने किया. हितकु पंचायत के मुखिया पलटन मुर्मू व खुकड़ाडीह माझी बाबा छोटराय हांसदा अतिथियों का अभिवादन कर रहे थे. सिदो कान्हू हूल गांवता के सचिव राजा राम मुर्मू के अनुसार हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बहुत ही सफलतापूर्वक हूल दिवस का सफल आयोजन हुआ. एक माह से ही विशेष तैयारी चल रहा था. हूल दिवस पर भूमि सुरक्षा कानून सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, पेशा कानून आदि का सक्ती से पालन का संकल्प लेना होगा.
हूल दिवस के पूर्व संध्या पर चिरगल हूल (जन जागरूकता अभियान) का आयोजन हितकू पंचायत के कदमा एवं बाना डूंगरी (हितकु) ग्राम में आतु माझी आखड़ा में आयोजन किया था, जिसमें राजदा माझी युवराज टुडू , सूनील हांसदा, मनोज हांसदा, प्रो. अंपा कुमार हेम्ब्रम आदि ने सभा को संबोधित किया. सहयोगी के रुप में सिदो कान्हू हूल गांवता के राजा राम मुर्मू, विक्रम मुर्मू, मनोज मार्डी, विशाल मार्डी, सूनील हेम्ब्रम, दुर्गा प्रसाद मुर्मू आदि उपस्थित थे. 
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