![]() |
जगन्नाथपुर प्रखंड के सेरेंगसिया घाटी में घाटी में एक स्थान पर प्रसिद्ध ग्राम देवता है,जहां पर आदिवासियों के पंरपरा के अनुसार उक्त रास्ते जो भी व्यक्ति गुजरता है प्रकृति पूजा के नियम के तहत पेड़ के पत्ते तोड़कर डाल दिया जाता है। इस नियम को सभी उस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी पालन करते है। उसी स्थान पर किसी असमाजिक तत्वों ने हिंदु देवी-देवताओं के मूर्तियों को रख दिया है। इस मूर्तियों को रखकर आदिवासियों का हिंदुकरण करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम से आदिवासी समाज में काफी आक्रोश है तथा सभी लोग मूर्तियों को अविलंब हटाने की मांग कर रहे है।इससे संबंधित पोस्ट फेसबुक पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। आदिवासियों के धार्मिक स्थलों पर इस तरह के असमाजिक काम कर बाहरी लोग उस स्थल का हिंदुकरण कर आदिवासियों को गुमराह करते है। इसका ताजा उदाहरण संतालों का धार्मिक स्थल पारसनाथ पहाड़ एंव राज्जराप्पा की स्थिति को देख सकते है, किस तरह इन स्थलों पर बाहरी हावी है तथा ये सभी आदिवासियों का मूल धार्मिक स्थल व धरोहर है।
बोकरो स्थित लुगुबुरू घंटा बाड़ी में भी धार्मिक अतिक्रमण हो रहा है तथा इन सभी गैर सामाजिक गतिविधियों का विरोध होना चाहिए, अन्यथा आदिवासियों का अस्तित्व बचना मुश्किल हो जाएगा। आदिवासी समाज के जागरूक व्यक्तियों को इन मुद्दों पर विचार कर असमाजिक तत्वों के ऊपर कड़ी कार्रवाई करना चाहिए।

0 Comments
Thank You For Appriciate...